M

Little pieces of an
unsatisfied soul.

सच के खंजर से क़ुल्ज़ुम-ए-खून में डूबी थी कभी,
अब खामोशी से हर इल्ज़ाम टाल देती हूं।
संभाल के रखा था दिल जब शीशे का था,
पत्थर का हो चुका है अब मज़े से उछाल लेती हूं!
- Shayara

Dil Life

एक राज़ हूं, राज़ रहने दो,
सीने में कहीं दबी आवाज़ हूं, खामोश रहने दो
इतनी भी क्या जल्दी है मेरा किरदार जानने की,
समय को मेरी मेहनत की दास्तां कहने दो!
- Shayara

Raaz Life
Want the Full Collection?

Read them all in
"Unsatisfied Soul."

View the Book